केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाने और फिटमेंट फैक्टर में बदलाव की मांग उठाई है। कई कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि न्यूनतम मूल वेतन को लगभग ₹54,000 तक बढ़ाया जाए और इसके लिए फिटमेंट फैक्टर को 3.0 या उससे अधिक रखा जाए। यदि ऐसा प्रस्ताव लागू होता है तो मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 में बड़ी बढ़ोतरी संभव हो सकती है।
कर्मचारी संगठनों ने भेजा प्रस्ताव
सरकारी कर्मचारियों के संगठन फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस (FNPO) ने इस विषय में नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) को एक ज्ञापन भेजा है। इस ज्ञापन में सुझाव दिया गया है कि 8वें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर 3.0 से 3.25 के बीच तय किया जाना चाहिए। कर्मचारियों का मानना है कि इससे वेतन संरचना को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बेहतर बनाया जा सकेगा।
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर पुराने मूल वेतन को बढ़ाकर नई सैलरी तय की जाती है। हर वेतन आयोग में यह फैक्टर अलग-अलग होता है। उदाहरण के तौर पर 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.92 था, जबकि 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया था। अब कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग में यह 3.0 या उससे अधिक रखा जाए ताकि कर्मचारियों को बेहतर वेतन मिल सके।
न्यूनतम वेतन तय करने का आधार
कर्मचारी संगठनों के अनुसार न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 1957 की इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस के मानकों को आधार बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों के परिवार की आवश्यक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खर्च का अनुमान लगाया जाता है। इसके लिए एक “खपत टोकरी” तैयार की जाती है जिसमें भोजन, कपड़े, ईंधन, बिजली, आवास और अन्य आवश्यक खर्च शामिल होते हैं।
इन खर्चों का अनुमान देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और अन्य महानगरों के औसत खुदरा मूल्यों के आधार पर लगाया जाता है। इसी गणना के आधार पर न्यूनतम वेतन का एक अनुमान तैयार किया जाता है।
परिवार यूनिट बढ़ाने की मांग
कर्मचारी संगठनों का यह भी कहना है कि वर्तमान समय में कई कर्मचारियों को अपने माता-पिता की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। इसलिए न्यूनतम वेतन की गणना करते समय परिवार की यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 किया जाना चाहिए। यदि यह सुझाव स्वीकार किया जाता है तो न्यूनतम वेतन का अनुमान और अधिक बढ़ सकता है।
फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की वजह
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में जीवन यापन की लागत काफी बढ़ गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, घर का किराया और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में कर्मचारियों का मानना है कि नई वेतन संरचना बनाते समय इन सभी खर्चों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
संभावित बदलाव से क्या होगा असर
यदि भविष्य में 8वें वेतन आयोग में उच्च फिटमेंट फैक्टर और नई वेतन संरचना को मंजूरी मिलती है तो केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है। हालांकि अभी यह सभी सुझाव कर्मचारी संगठनों की मांग के रूप में सामने आए हैं। अंतिम निर्णय सरकार और वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही लिया जाएगा।